चक्रवृद्धि ब्याज

चक्रवृद्धि ब्याज निकालता है — मूलधन, वार्षिक ब्याज दर, अवधि और चक्रवृद्धि की आवृत्ति डालिए और कुल राशि तथा अर्जित ब्याज तुरंत दिख जाएगा। साधारण ब्याज से अंतर यही है कि यहाँ हर अवधि में जुड़ा ब्याज अगली बार खुद भी ब्याज कमाता है।

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कैसे उपयोग करें

  1. मूलधन यानी शुरुआती राशि डालिए।
  2. वार्षिक ब्याज दर प्रतिशत में लिखिए, जैसे 7।
  3. अवधि वर्षों में डालिए और चक्रवृद्धि की आवृत्ति चुनिए — वार्षिक, तिमाही या मासिक।
  4. कुल राशि और उसमें से ब्याज का हिस्सा देखिए; दर या अवधि बदलकर तुलना कीजिए।

कब काम आता है

आवृत्ति क्यों मायने रखती है

सूत्र A = P(1 + r/n)^(nt) है, जिसमें n बताता है कि वर्ष में कितनी बार ब्याज जोड़ा जाता है। एक ही दर पर मासिक चक्रवृद्धि वार्षिक से थोड़ी अधिक राशि देती है — 7 प्रतिशत पर दस वर्षों में यह अंतर लगभग दो प्रतिशत का पड़ता है। इसीलिए योजनाओं की तुलना नाममात्र दर से नहीं, बल्कि प्रभावी वार्षिक दर से करनी चाहिए। एक मोटा अनुमान याद रखने लायक है: 72 को ब्याज दर से भाग देने पर राशि के दोगुना होने के वर्ष लगभग मिल जाते हैं, यानी 8 प्रतिशत पर करीब नौ वर्ष। ध्यान रहे कि यह गणना कर, महँगाई और शुल्क को शामिल नहीं करती — भारत में सावधि जमा का ब्याज आपकी स्लैब दर पर कर योग्य होता है, इसलिए हाथ में आने वाली वास्तविक राशि यहाँ दिखाए मान से कम रहेगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चक्रवृद्धि ब्याज कौन-सा सूत्र इस्तेमाल करता है?

यह इस गणना के लिए प्रकाशित मानक सूत्र को ज्यों का त्यों लागू करता है और अंतिम परिणाम आने तक कोई राउंडिंग नहीं करता। आपके दिए मान ही एकमात्र चर हैं — कोई छिपी धारणा या क्षेत्रीय समायोजन नहीं।

चक्रवृद्धि ब्याज का परिणाम कितना सटीक है?

गणित उतना ही सटीक है जितनी परिशुद्धता आपका ब्राउज़र देता है। व्यवहारिक सटीकता आपके इनपुट पर निर्भर है: राउंड की गई संख्याओं से बना अनुमान अनुमान ही रहेगा, इसलिए अपने पास उपलब्ध सबसे सटीक मान डालें।

क्या मैं इसे आधिकारिक या वित्तीय निर्णयों के लिए इस्तेमाल कर सकता हूँ?

इसे पेशेवर सलाह नहीं, बल्कि एक सुगणित अनुमान मानें। चिकित्सा, कर, कानूनी या ऋण से जुड़े निर्णयों के लिए अमल से पहले किसी योग्य पेशेवर या संबंधित संस्था से आँकड़े की पुष्टि करें।

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